Fault tree analysis is a procedure that reduce the level of risk at work place

Fault Tree Analysis (FTA) –

Fault tree analysis की आवश्तयकता तब पड़ती है जब हम किसी industry में काम कर रहे होते हैं तो कार्य होने से पहले plan करते हैं या कह सकते हैं की रणनीति बनाते हैं  और कोई ज़रूरी नहीं होता है की जिस plan या रणनीति के तहत कोई भी कार्य हो रहा हो तो वह पूर्ण रूप से सफल हो.

ऐसे में जब कोई भी कार्य असफल होता है तो हम यह जानने का प्रयास करने हैं की आखिर कार्य के दौरान कहाँ कमी रही? एक बार जब root cause के बारे में पता चल जाता है तो हम उस कार्य के quality को maintain करने या कुशलता पूर्वक करने का हल ढूंढते हैं. इसी को fault tree analysis कहते हैं.

जहाँ तक FTA (Fault Tree Analysis) के प्रयोग का प्रश्न है, यह engineering, safety और manufacturing आदि क्षेत्रों में इसका प्रयोग किया जाता है. हालाँकि fault tree analysis का प्रयोग किसी भी sector में किया जा सकता है.

अगर कम शब्दों में कहें तो “कोई भी system कैसे failure हो सकता है यह देखकर fault tree analysis यह निर्धारित करने में मदद कर सकता है कि समस्याओं के जोखिमों को कम करने के लिए कौन से और किस तरह के कदम उठाये जा सकते हैं.”

FTA का प्रयोग केवल असफल कार्यों के root causes जानने के लिए नहीं होता है बल्कि इसका प्रयोग किसी भी ज्ञान समस्या के जाँच के लिए भी किया जा सकता है. कह सकते हैं कि किसी समस्या को होने से पहले उन्हें खोजने के रूप में इसका प्रयोग ज्याद कारगर साबित हो सकता है.

हम एक tree बना कर उस प्रत्येक क्षेत्रों के बारे में analysis कर सकते हैं जहाँ risk की संभवना हो सकती है. यही कारण है की fault tree analysis उच्च जोखिम (high risk) वाले वातावरण के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है, जहाँ किसी भी प्रकार एक समस्या एक बड़े मुद्दे का कारण बन सकता है.

Full Name of FTA in Safety – Fault Tree Analysis

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Fault Tree Analysis Steps –

Industry के अन्दर किसी भी तरह के work environment को प्रभावी ढंग से करने के लिए कुल steps का अनुसरण करना होता है जो निमंलिखित हैं.

  1. Identify the undesired event –

किसी भी कार्यस्थल पर जितने भी संभावित खतरे नज़र आ रहे हैं , अगर संभव हो तो बहुत ही गहराई से उस hazards को वर्णन करना चाहिए. इसके साथ  safety, environment के अलावा सभी नियामक परिणामों के सम्बन्ध के प्रभाव पर विचार करें. इसके आलावा यह भी सुनिश्चित करना होता है कि workplace पर इसके प्रभाव कितने होंगे और कितने समय तक उपलब्ध रहेंगें.

2. Work to understand the current system –

  • जहाँ कार्य हो रहा है वहाँ पर जितनी भी उचित जानकारियां है उसे इकठ्ठा करें जैसे- list of component, boundary diagram, schematics (योजनाबद्ध) तथा जितने कोड की अवश्यकता है वह सभी.
  • खतरे का क्या कारण हो सकते हैं अर्थात खतरे के कारणों को निर्धारित करने के लिए जो engineer होते हैं उनसे input इकट्ठा करना होता है.
  • इसके अंतर्गत उन कारणों का पता लगाते हैं जो कार्यस्थल को खतरे की ओर ले जाते हैं.
  • जो घटना का क्रम है उसे probability के आधार पर व्यवस्थित करना इसमें शामिल होता है.
  1. Create the fault tree –

  • Fault tree diagram को बनाने के लिए fault tree symbol का प्रयोग करना होता है.
  1. Evaluate –

  • फॉल्ट ट्री के जितने भी addition होते हैं , उन प्रत्येक में risk के level को तय करते हैं. और उनमें यह देखते हैं कि सबसे अधिक जोखिम का कारण क्या है उस कमी को दूर करने के लिए तत्परता दिखाते हैं.
  1. Control the Identified hazards –

अगर इस अंतिम steps की बात करें तो यह step वह होता है जो प्रत्येक कार्यस्थल के भीतर अधिक परिवर्तन किया जाता है. इसमें निमं कमियों को दूर करते हैं जो workplace या work environment पर risk के level को कम करते हैं.

  • अगर अवश्यकता हो तो जो कार्य को design किया गया है उसमें परिवर्तन करते हैं.
  • जितने भी खतरनाक equipment होते हैं या तो उन्हें बदल देते हैं या उन्हें replace कर देते हैं.
  • कुछ components के लिए जो भौतिक रूप से बेकार होते हैं उन्हें बदल देते हैं.
  • अगर कहीं software में कमी दिखती है उसे दूर करते हैं.
  • या फिर ऐसे तकनीकी का प्रयोग करते हैं जो गुणवत्ता से लैस हो.

इसके जितने भी steps होते हैं fault tree analysis प्रकिया के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं. यह steps FTA को अन्य समस्या का समाधान करने और खतरे के पहचानने के तरीकों को विशिष्ट बनाते हैं.

अगर दुसरे शब्दों में कहें तो “संभावित विफलता की पहचान ना केवल risk के level को कम करने के लिए होता है बल्कि संभावित खतरों को दूर करता है जिसे कार्य करने से पहले दूर करना अनिवार्य होता है. Fault tree analysis जो employees होते हैं उसके unsatisfactory experience को रोकने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

Fault Tree Analysis Symbols in Hindi –

FTA Diagram के अन्दर जितने भी symbols दिखते हैं उससे users को परिचित होना बहुत आवश्यक होता है. FTA Diagram के जितने भी symbols होते हैं वह सभी logical gates के रूप में समझ प्रदान करते हैं और कार्य से पहले या फिर किसी प्रकार की घटना होने के पश्चात् root cause तक पहुँचने में मदद करते हैं.

Fault Tree Symbol को दो भागों में विभक्त किया  गया है .

  1. Event Symbol –

  • A Basic Event – इसकी अवश्यकता तब पड़ती है जब कोई system component पूरी तरह से असफल हो जाता है.
  • An External Event – ऐसे कोई घटना जिसे घटित होने की सम्भावना हो परन्तु उसमें किसी प्रकार का fault ना हो या fault ना मना जाता हो.
  • A Conditioning Event – वह condition जो logic gate को प्रतिबंध करने का काम करती हों.
  • An Undeveloped Event – ऐसी कोई घटना जिसके कोई परिणाम नहीं होते हैं या उसके पास पर्याप्त data नहीं होते हैं.

2. Gate Symbol –

  • OR Gate – जब किसी स्थान पर कम से एक input event होता है तो निमंलिखित undesired event होती है.
  • AND Gate – Input के रूप में क्लासिफाइड सभी घटनाएँ होने पर ही अवांछित घटना घटित होती है.
  • Exclusive OR Gate – घटनाएँ तभी घटित होती हैं जब कार्य के दौरना जितनी भी शर्तें होती हैं उनमें से किसी एक से समझौता कर लेते हैं. इसके लिए सभी condition से समझौता करना आवश्यक नहीं होता है.
  • Priority AND Gate – किसी भी कार्यस्थल पर घटनाएँ तभी घटित होती हैं जब कार्य करने की जो शर्त होती है उसके क्रम में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करते हैं.
  • Inhibit Gate – घटना केवल तभी घटित होंगी जब सभी तरह के input के साथ सशर्त घटनाएँ हुई हों.

FTA Characteristics –

  • यह किसी भी system को analysis करने का एक व्यवस्थित तरीका है.
  • यह सभी तरह के system ऊपर से नीचे तक analysis करता है.
  • इसे graphics symbol से प्रदर्शित किया जाता है.
  • इसके महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर जोर देने के लिए गणितीय उपकरण शामिल हैं.

FTA Provides –

  • Loss event से जुडी सभी तरह के event को graphics के माध्यम से प्रदर्शित किया जाता है.
  • जो किसी भी घटना के दोषी होते हैं इसके माध्यम से उन्हें पहचाना जाता है.
  • यह system के विशेषताओं की व्याख्या करता है.
  • यह किसी भी event के नुकसान की सम्भावन को गुणात्मक(Qualitative ) और मात्रात्मक( Quantitative) रूप से समझ प्रदान करता है.
  • किसी भी कार्य के विफलता को रोकने के लिए प्रतिबद्ध संसाधनों की पहचान कराता है.
  • किसी भी कार्य के दौरान जो risk होते हैं उन्हें कम करने के लिए संसाधनों के पुनः वितरण के लिए सुझाव प्रदान करता है.
  • किसी event के analysis के दौरान डॉक्यूमेंटेशन का सुझाव प्रदान करता है.