कह सकते हैं कि तनाव (stress)का कारण कार्य स्थल पर मांगों की एक व्यक्तिगत प्रक्रिया है तो employees पर अधिक दबाव उत्पन्न कर सकता है. काम के दौरान pressure का होना ज़रूरी होता है जो काम करने ले लिए motivate करता है लेकिन तनाव का कारण बन सकता है.

बहुत से ऐसे non-work factors होते हैं जिसका working site से कुछ लेना देना नहीं होता है वह भी stress का कारण बन जाता है या फिर stress के level को बढा सकता है. यह आप के ability को प्रभावित कर सकता है  और यह अधिक संवेदनशील हो सकता है.

Working site/Organization के अन्दर कई बार देखा गया है कि आप के plan के अनुसार सब कुछ चल रहा होता है लेकिन फिर भी दुर्घटना कम होने का नाम नहीं लेता है. और जब आप उस घटना या दुर्घटना के तह तक जाते हैं अर्थात जब आप accident investigation करते हैं तो पाते हैं की दुर्घटना का कारण psychological stress है जो बार-बार दुर्घटना का कारण बन रहा है.

इसलिए जब आप tool box talk दे रहे हैं तो stress के बारे में भी बात करें. जब आप को किसी workers के stress के बारे में पता चल रहा है या आप को देखकर कुछ ऐसा लग रहा है कि फलां employees ज्यादा परेशान है तो आप उसके परेशानी को जानने का पूर्ण प्रयास करें.

क्योंकि कोई employee अगर परेशान है तो कभी वह अपना सौ प्रतिशत नहीं दे सकेगा. क्योंकि काम के दौरान वह खुद को concentrate नहीं कर पायेगा ऐसे में उस विशेष व्यक्ति से गलती होने की सम्भावना बढ़ जाती है और ऐसे में दुर्घटना की संभवना में भी बढ़ोतरी हो जाती है.

ऐसे में working site पर ऐसी स्थिति न उत्पन्न हो उससे पहले आप स्थिति का आंकलन करना आवश्यक हो जाता है. और यह तब होगा जब समय visit करते हैं, समस्याओं के बारे में बात करते हैं और उसे दूर करने को प्रयासरत दिखाते हैं.

कोई ज़रूरी नहीं है कि stress केवल परिवारिक कलह से उत्पन्न होता है. बल्कि इसके बहुत सारे कारण होते हैं यहाँ हम उन्ही stress के कारणों के बारे में बात करेगें जो working site पर दुर्घटना का कारण बनता है. अतः आप को उन बिन्दुओं के बारे में ध्यान देना होगा या उस स्थिति का आंकलन करना होगा.

जब तक आप उस स्थिति का आंकलन करने में असफल रहेगें तब तक आप stress से होने वाले दुर्घटना पर विराम नहीं लगा सकते हैं. अतः आप का उस स्थिति को भांपना होगा और उसे जितना जल्दी हो सके उसे दूर करना होगा.

अब आइये stress के कारण को जानते हैं जो दुर्घटना का कारण बनता है या बन सकता है.

Work Factors that Create Stress can include –

  1. जब कई बार production की मांग अधिक हो जाती है या फिर किसी भी प्रोजेक्ट को जल्दी खत्म करने के top management के द्वारा दबाव बनाया जाता है फिर supervisor के द्वारा workers को जल्दी काम खत्म करने के लिए दबाव बनाया जाता है तो stress का कारण बन जाता है.
  2. अगर पर्याप्त काम नहीं होता है तो भी workers अन्य बात सोच कर या फिर दुसरे employees से कहा-सुनी कर stress में आ जाता है ( हिंदी में एक कहावत कही जाती है, खाली दिमाग शैतान का)
  3. अगर कोई कार्य किया जा रहा हो और यह बात सताये जा रही है की पता नहीं कार्य सफल हो पायेगा या नहीं.
  4. अगर supervisor के तरफ से या अन्य किसी के द्वारा working site पर किसी workers को धमकाया जाता है तो यह भी stress उत्पन्न कर सकता है.
  5. कार्य शुरू होने से पहले उसे design नहीं किया गया हो और सब कुछ workers के ऊपर छोड़ दिया गया हो, जिसके कारण कार्य करने वाले के ऊपर stress बढ़ता है जो दुर्घटना का कारण बन जाता है? क्योंकि workers यह जान नहीं पाता है कि कार्य को कैसे शुरू किया जाए और कैसे खत्म?

Non-Work Factors that Create Stress can Include-

1.Family Life-

परिवारिक कलेश के कारण या परिवारिक जीवन में होने वाले उतार चढ़ाव के कारण व्यक्ति stress का शिकार हो जाता है और इसके कारण किसी भी कार्य के लिए खुद को concentrate नहीं कर पाता है जो दुर्घटना का कारण बन जाता है.

2.Financial Worries-

पैसे की परेशानी कई बात चिंता का कारण बन जाता है. यह भी psychological stress के लिए काफी होता है.

3.Divorce-

कई बार परिवारिक जीवन में पति –पत्नी के बीच बात इतनी बढ़ जाती है की divorce तक की नौबत आ जाती है और यह stress का कारण बन जाता है जो काम में व्यवधान उत्पन्न करने के लिए काफी रहता है.

4.Birth of Child-

बच्चे के जन्म की समय financial की सम्भावना आ सकती है या फिर किसी डर की आशंका के कारण व्यक्ति मानसिक दबाव उत्पन्न कर सकता है.

उपर्युक्त सभी बातों को ध्यान देते हुए इस निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है कि जितने भी duty holders होते हैं उन्हें जितने भी stress देने वाले कारक होते हैं उसे दूर करने के कारण को जितना जल्दी हो सके ढूँढना चाहिए.

आइये कुछ ऐसे stress होते हैं जिसके बारे में बात करना आवश्यक होता है, जिससे जानने के पश्चात् दूर रहा जाए या उसे दूर करने का प्रयास किया जाये अन्यथा यह शरीर के अन्दर बिमारियों का घर हो जाएगा.

Psychological Effects-

मनोवैज्ञानिक प्रभाव के कारण निमं बिमारियों का सामना करना पड़ सकता है-

  • Blood pressure बढ़ता है.
  • व्यक्ति थका हुआ महसूस करता है.
  • खाना जल्दी नहीं पचता है.
  • या तो वजन बढ़ता है या फिर घटता है.
  • सिर में हमेशा दर्द बना सकता है.
  • चेहरे पर झुर्रियां जल्दी पड़ जाती है.
  • पसीना अधिक आता है, ठंडक में भी यह देखने को मिलता है.
  • गर्दन और कंधे की मांसपेशियों में दर्द.
  • आँख से कम दिखने लगता है.

Emotion Effect-

  • अगर कोई व्यक्ति stress के कारण emotion होता है तो tension बढ़ता है.
  • व्यक्ति अत्यधिक चिंतित होने लगता है.
  • व्यक्ति अवसाद( depression) का शिकार हो जाता है.
  • व्यक्ति frustrate होने लगता है और उसे लगता है कि वह अपना आत्मसम्मान खो चुका है या खो रहा है.

Behavioural Effects-

  • खाने में अरुचि दिखाना, जिसके कारण ऊर्जा में कमी होती है और काम में मन नहीं लगता है.
  • भूख से अधिक खाना.
  • काम के दौरान अल्कोहल और ड्रग्स का लेना, जो stress का कारण बनता है और इसके कारण दुर्घटना हो सकती है.
  • जब सम्बन्ध एक दूसरे से न ठीक हों अर्थात पारस्परिक सम्बन्ध में खटास हो.
  • अगर अनिद्रा की शिकायत तो यह stress के लिए काफी होता है.
  • आक्रामक या फिर निष्क्रिय behaviour भी कभी-कभी stress का कारण बन जाता है.
  • अगर कोई व्यक्ति जानकारी के आभाव में कार्य करने में संघर्ष कर रहा है या फिर अनुपस्थिति के कारण work load बढ़ जाता है जो stress देने के लिए काफी होता है.

जब हमें stress से सम्बंधित होने वाले hazards के बारे में पता चल जाता है तो हमारा दायित्व होता है कि जितना जल्दी हो सके उसे दूर करने की अवश्यकता होती है. इसके लिए आप को प्रमुख छः बिदुओं पर प्रमुखता से काम करने की अवश्यकता होती है. आप दुसरे तरह से कह सकते हैं की work को design करते हुए आप को छः बिन्दुओं को अवश्य सम्मिलित करना चाहिए.

Six Keys –

Demands-

सबसे पहले यह देखते हैं की work load क्या है, इसके बार कार्य के pattern को समझते हैं फिर उसके अनुसार कार्य करने के ढंग को देखते हैं और कार्य करने के वातावरण पर विशेष ध्यान देते हैं.

Control-

जब कोई काम करने जा रहा है तो उस विशेष व्यक्ति से काम करने के तरीकों के बारे में कितना कहना है यह पहले तय हो जाना चाहिए ? अगर उस विशेष व्यक्ति से अवश्यकता से अधिक बात करते हैं तो वह confuse हो सकता है.

Support-

संगठन और सहयोगियों द्वारा प्रदान किया जाने वाला प्रोत्साहन समय-समय पर दिया जाना आवश्यक होता है जो employee के कॉन्फिडेंस level को बढ़ाने के लिए बहुत आवश्यक होता है.

Relationship-

जब plan बनाते हैं तो उनमें विशेष कर इस बात पर ध्यान देते हैं unacceptable behavior से बचने के लिए क्या किया जायेगा और इसके संघर्ष से बचने के लिए सकारात्मक तरीका क्या हो होगा.

Role-

क्या लोग organization में काम करने हुए अपनी भूमिका (role) को समझ रहे हैं या नहीं और क्या organization इस बात पर विशेष ध्यान देता है कि लोगों के बीच परस्पर विरोध की भूमिका न रहे और इस पर काम करता है या नहीं.

Change –

Organization के अन्दर काम करते हुए छोटे या बड़े स्तर पर परिवर्तन या प्रतिबन्ध कैसे हुआ और इसके लिए communication कैसे होगा यह पहले निर्धारित हो जाना चाहिए.

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