Heat Stress Safety Tips in Hindi

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    Portrait of tired coal miner wiping forehead his hand against a dark background

    Heat Stress का शाब्दिक अर्थ ‘लू’ लगना होता है.Heat Stress तब होता है जब शरीर लगातार गर्मी से छुटकारा नहीं पता अर्थात गर्मी के संपर्क में रहता है.जब ऐसा होता है तो जो body का normal temperature होता है उससे बढ़ जाता है.आप के body के normal temperature 360C  से 370C  के बीच होना चाहिए.

    Heat Stress Pic-1

    “इंडिया में 6000 व्यक्तियों को लू लगने से प्रति वर्ष मृत्यु होती है.”

    जब व्यक्ति के शरीर का temperature जैसे-जैसे बढ़ता है वैसे ही व्यक्ति की हृदय गति बढ़ जाती है और जब शरीर के अंदर गर्मी इकट्ठा होने लगता है तो व्यक्ति तो व्यक्ति concentration कम होने लगता है और उसके कार्य करने की क्षमता कम होने लगती है तथा वह किसी कम पर ध्यान केन्द्रित नहीं का पता है.

    ऐसे में वह व्यक्ति चिड़चिड़ा या बीमार हो जाता है और किसी भी प्रकार के liquid पीने की इच्छा खो देता है.इस संकेत को अगर seriously नहीं लिया गया तो व्यक्ति बेहोश हो जाता है और शरीर को ठंडा न किया गया तो उसकी मृत्यु भी हो सकती है.

    Heat stress का कारण गरम हवा का चलना,high humidity या फिर किसी गरम वस्तु के संपर्क में आना हो सकता है.

    Heat Stress ( Heat Stress kya hai )-

    Heat Stress एक ऐसे बीमारी है जो अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने के कारण हो सकती है.जिसमे आदमी के body का temperature 400C(1040 F) तक चला जाता है.यह तब होता है जब शरीर hot environment के संपर्क में आने पर उसे बनाए रखने में असमर्थ हो जाता है.

    Symptoms of Heat Stress (Heat Stress ki Pahchan )-

    Heat Stress Pic-2

    Heat stress को पता करने के लिए उसके symptoms को जानना ज़रूरी होता है.यह जब तक नहीं जानते तबतक heat stress के चपेट में आने वाले व्यक्ति को बचाव का सही सुझाव नहीं दे सकते,जिससे व्यक्ति को और समस्या का सामना करना पड़ सकता है.

    आइये heat stress के symptoms को जानते हैं नो निम्नलिखित हैं-

    High Body Temperature-

    किसी भी स्वास्थ्य व्यक्ति के body का temperature 360C  से 370C  के बीच होता है लेकिन अगर किसी धूप में या hot environment में काम के दौरान अगर किसी के body का temperature 400C  से ऊपर हो जाता है तो यह heat stress की चपेट में हैं.

    Lack of Alertness (Mental State or Behavior)-

    जब कोई भी व्यक्ति लू की चपेट में आता है तो उसके behavior में परिवर्तन आ जाता है अर्थात व्यक्ति सही से बोल नहीं पाता है, बात-बात पर गुस्सा आ जाता है या कह सकते हैं कि व्यक्ति चिड़चिड़ापन हो जाता है, सही से बात नहीं कर पाता है या कह सकते हैं कि उसका metal stable होता है वह सही से कम नहीं करता है. जो heat stress कि पहचान होती है.

    Vomiting-(उल्टी होना)

    अगर व्यक्ति high temperature में काम कर रहा है और उसके body के temperature  400C  से अधिक चला गया है और वह vomiting करने लगता है तो यह भी लू का एक symptoms होता है.

    Rapid Breathing

    एक स्वस्थय व्यक्ति समान्य साँस लेता है लेकिन वही व्यक्ति अगर लू लगने के चपेट में आता है तो अकभी तेज तो कभी धीमी साँस लेने लगता है.यह भी heat stress के एक पहचान है.

    Racing  Heat Rate-

    जब कोई भी व्यक्ति heat stress के चपेट में आता है तो उसकी heart rate बढ़ जाती है.

    Headache-

    जब किसी भी व्यक्ति को लू लगता है उसके सर में दर्द होता है और यह लंबे समय तक रहता है.

    Weakness-

    लू कि चपेट में आने वाले व्यक्ति काफी कमजोर हो जाता है.खड़ा होने के पश्चात उसे चक्कर आता है और वह व्यक्ति काम के दौरान जल्दी ही थक जाता है.अगर इस तरह का condition व्यक्ति के सामने है तो वह लू कि चपेट में है.

    Fatigue-

    लू लगने वाले व्यक्ति को जल्दी थकान होता है.पहले कि तरह वह काम नहीं कर पाता है.काम के दौरान वह जल्दी थक जाता है.वह भी heat stress के चपेट में आने वाले लक्षर्णों में से एक है.

    Pains in Muscles- 

    लू लगने के पश्चात व्यक्ति के muscles में काफी दर्द होता है.जिस तरह fever के समय व्यक्ति के शरीर में अकड़न रहती है.

    A weak or Fast Pulse-

    जब कोई भी person heat stress के चपेट में आता है तो कई बार वह बेहोशी के हालत में चला जाता है.ऐसे में उस समय व्यक्ति की जो pulse होती है या तो वह तेज हो जाती है या वह बहुत धीमा हो जाता है.

    Clammy Cold or Pale Skin-

    जब किसी व्यक्ति को लू लगती है तो ऐसे में व्यक्ति की त्वचा पीलीपड़ जाती है,शरीर ठंडा पड़ जाता है या फिर चिपचिपा हो जाता है.

    An increase in Incident-

    जब किसी व्यक्ति को लू लगती है तो ऐसे में उस व्यक्ति का concentration नहीं बन पाता है ऐसे में working site या construction site पर incident में या accident में बढ़ोतरी देखने को मिलती है.

    Excessive Sweating-

    लू लगने वाले व्यक्ति को अगर normal temperature में लाया जाता है तो भी उसके शरीर से लगातार पसीना बाहर आता है.यह भी लू लगने का कारण हो सकता है.

    अगरऊपर जितने भी symptoms किसी भी व्यक्ति के अंदर नज़र आते हैं तो आप को यह जानने में देर नहीं करना चाहिए की व्यक्ति heat stress के संपर्क में है.

    Cause of Heat Stress (Heat Stress ka karan )-

    Heat Stress Pic-3

    Heat stress के कारण होते हैं, जब तक इनके कारणों को नहीं जानते हैं तब तक इसे दूर करने का प्रयास कैसे करेंगे.अतः इसके heat stress के कारणो को कारणो को निम्नलिखित बिदुओं के माध्यम से जानते हैं.

    Exposure to a hot Environment-

    अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक ऐसे वातावरण मे काम करता है जहाँ का temperature बहुत गरम है तो उसको गर्मी होगी जिसके कारण पसीना बाहर निकलेगा ऐसे में अगर वह समय-समय पर पानी नहीं पीता है तो उसे dehydration की पूरी संभावना रहेगी और उस व्यक्ति के लू लगने के भी संभावना बढ़ जाती है.

    Wearing Excess Cloth-

    गर्मी में अगर आप अधिक कपड़े पहनते हैं तो ऐसे मे आप हे शरीर की जो गर्मी है वह बाहर नहीं जाएगा और बाहर से हवा शरीर के अंदर नहीं प्रवेश करेगा जिसके कारण heat stress की संभावना 100 प्रतिशत बनी रहती है.

    Drinking Alcohol-

    अगर कोई व्यक्ति शराब पीता है तो उसके body का temperature बढ़ जाता है.ऐसे में कोई अगर वह धूप में लंबे समय तक सफर करता है या फिर high temperature में काम करता है तो ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति को लू लगने की संभावना होती है.

    Become dehydrated-

    अगर आप के शरीर के अंदर पानी की मात्रा कम हो जाती है तो ऐसी स्थिती को हम dehydrated बोलते हैं.अगर व्यक्ति high temperature में काम करता है और पानी ज्यादा नहीं पीता है तो वह लू का शिकार हो सकता है.क्योकि पानी पीने से body का temperature cool होता है और वह पानी के आभाव में cool नहीं रह पाएगा जो heat stress का कारण बन सकता है.

    Risk Factor for Heat Stress-

    Heat Stress के कुछ risk factor को हम यहाँ बताएँगे जिसे काम के समय उसे याद रखने की ज़रूरत होती है.अगर आप चूक करते हैं तो काम करने वाले employee को लू की चपेट में आने की संभावना रहती है.

    1.The Outdoor works-

    जब बाहर काम हो रहा है तो इस बात का ध्यान रखना होता ही temperature क्या है?तापमान ई अधिकता में किसी भी व्यक्ति को काम करने की अनुमति न दें.यह लू का कारण बनता है.U.A.E में June से लेकर September तक 12 बजे से 4 बजे की बीच किसी भी workers को धूप में बाहर काम करने की अनुमति नहीं होती है.पकड़े जाने पर contractorया company को हर्जाना के तौर पर एक बड़ा amount देना पड़ता है.

    2.Bakeries-

    Bakeries के लिए काम करने के पश्चात भट्ठी के कारण वहाँ का temperature गरम होता है ऐसे में अगर वहाँ काम करने वालों को लू की संभावना बरकरार रहती है.

    3.Construction Site-

    कई बार construction का work ऐसे स्थान पर होता है जहां का temperature अधिक होता है और वहाँ किसी भी प्रकार का rest room  नहीं होता है ऐसे में अगर कोई लंबे सामी तक high temperature में काम करता है तो लू लग सकता है.

    4.Fire Fighting and Other Emergency Response-

    जहाँ आग लगती है तो उसके आस-पास का temperature काफी गरम हो जाता है ऐसे में अगर कोई व्यक्ति rescue operation करता है या fire fighting करता है अधिक तापमान की चपेट में आने की संभावना रहती है.

    Individual factor cause illness from heat stress-

    Heat stress का व्यक्तिगत कारण भी होता है जिसे निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-

    • अगर workers 65 वर्ष या उससे ज्यादा का है तो temperature की थोड़ी सी अधिकता में वह heat stress का शिकार हो सकता है.
    • अगर कोई व्यक्ति heart संबन्धित बीमारी से ग्रसित हो या फिर high blood pressure का मरीज हो तो बाहर काम करने के दौरान वह लू की चपेट में जल्दी आता है.
    • जो workers दवाओं पर निर्भर होता है और गर्मी से संभावित रूप से प्रभावित हो तो वह लू का शिकार हो सकता है.
    • Over Weighted व्यक्ति अगर थोड़े देर ही सही temperature की अधिकता में काम करता है तो उसे लू लगने की संभावना अधिक रहती है.
    • अगर कोई व्यक्ति druggistहै और इसका सेवन करने के पश्चात बाहर काम करता है तो उसे बहुत जल्दी heat stress का सामना करना पड़ता है.क्योकि drug लेने के बाद व्यक्ति के शरीर का temperature अधिक बढ़ जाता है और धूप मे काम करने पर लू लग जाता है.
    • अगर कोई व्यक्ति high temperature में काम करता है और उसे अधिक पसीना होता है और वह समय-समय पर liquids का सेवन नहीं करता है तो उसे बहुत जल्दी heat stress का सामना करना पद सकता है.

    Quick Action after Heat Stress-

    जब कोई व्यक्ति heat stress से affected है तो आप का सबसे पहले ambulance को call करें, first aider को बुलाये और निम्नलिखित बिन्दुओं का अनुसरण करें.

    • जो भी व्यक्ति लू के संपर्क में आया है सबसे पहले उसे छाँव में लेटायेंगे या उसे उस रूम में लेकर जाएंगे जहाँ का तापमान normal है.
    • जिस व्यक्ति को लू लगा है उसके सभी access कपड़े को उतार देंगे जिससे शरीर बाहरी हवा के संपर्क में आए और जल्दी ठंडा हो सके.
    • लू के संपर्क में आने वाले व्यक्ति को ठंडा करने का प्रयास करेंगे जैसे उसके शरीर पर पानी से spray करेंगे, उसके शरीर को गीले कपड़े से पोंछेगे और उसके सर पर गीला कपड़ा रखेंगे जिससे उसका शरीर normal हो सके.

    Prevention of Heat Stress –

    Heat Stress Chance Working Outdoor

    उपर्युक्त बिन्दुओं के माध्यम से ये जानने का प्रयास किया कि अगर कोई लू कि चपेट में आता है तो क्या करना होता है,लेकिन अब उसके prevention अर्थात बचाव के बारे में जानेंगे कि working site पर कौन सा action लेंगे जिससे वहाँ काम करने वाला व्यक्ति heat stress की चपेट में न आए.आइए उसे निम्नलिखित बिन्दुओं से समझने का प्रयास करते हैं.

    • बाहर काम करते समय इस बात का ध्यान देना चाहिए कि जो workers high temperature में काम कर रहे हैं उसने loose कपड़े या कम कपड़े पहन रखा है या नहीं.जिससे शरीर का temperature maintain रहे अर्थात शरीर के अंदर कि गर्मी बाहर निकलती रहे और शरीर में हवा लगती रहे.जिससे शरीर का तापमान कम रहे.
    • अगर धूप बहुत तेज है तो ऐसे में काम को नहीं करना है.जिससे आप direct sun light के संपर्क में न आयें.
    • धूप में काम करने समय अधिक से अधिक liquids का सेवन करें जिससे dehydration का सामना न करना पड़े और वह लू लगने का कारण बन सके.
    • पूरे दिन में कम से कम 7 से 8 ग्लास पानी का सेवन करना चाहिए.
    • जब आप धूप में कार को park करते हैं तो उसमें न बैठे या किसी भी व्यक्ति को उसमें बैठने के लिए न बोलें.क्योकि कार में जो air होता है वह circulate नहीं होता है और कार के अंदर temperature काफी high होगा जो लू का कारण बन सका है.अगर A .C on किए हैं तो ये अलग बात है.
    • अगर workers  धूप में लंबे समय तक काम कर रहा है तो वह लू कि चपेट में आ सकता है.ऐसे में ज्यादा समय तक लगातार धूप में काम करने से बचना चाहिए.बीच-बीच में rest लेने के पश्चात काम करना चाहिए.

    इसे पढ़ने के पश्चात इसे आप अपने working site पर rules को follow करें और अपने workers को भी follow करने के लिए कहें जिससे कि अधिक तापमान में कम करने के दौरान वह लू का सामना न करना पड़े और वह सुरक्षित काम कर सके.

    इसे भी पढ़ें-

    इस पोस्ट में निम्नलिखित बिदुओं की चर्चा की गयी है-

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